" क्यों ना फिर चलें प्रेमचंद- शरतचंद्र की ओर...!!! "

Monday, 5 November 2018

लौह-पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल.. एक टाईम लाईन समीक्षा..

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बड़ी दीदी के स्कूल से आते ही.. नए स्टैंडर्ड के नए किताबों के साथ और उसमें जेनेरल नॉलेज या हिस्ट्री के किताबों से झाँकती सरदार वल्लभ भाई पट...
Monday, 15 October 2018

नैमिषारण्य के हृदय-स्थल से...

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नैमिषारण्य के हृदय-स्थल से... 🌿🍀🍃💚🌿🍀🍃💚🌿🍀🍃💚🌿🍀   शैव क्यों मैं जग जाता हूँ.. उषा काल के प्रखर प्रकाश में खो जाता हूँ.. श...
Wednesday, 10 October 2018

प्रतीक्षा..

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"..इट्स अर्जेन्ट" आपका आभारी देवदत्त राय। पढते ही हैरान था कि कैसे समय के साथ एक एक कर सब गुम हो जाते हैं.. आपकी आईडेन्ट...
6 comments:
Tuesday, 9 October 2018

पहली रोटी गाय की..

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  ...अहा ..पहली रोटी गाय की ..इसी समृद्ध भाव में तो बचपन बीता था मेरा ..अपने ज्ञान से ही घर पे गायों की आभा को देखता आया हूँ ..कैसे दादी ...
Monday, 8 October 2018

प्रेमचंद साहित्य की फिल्में व उद्देश्य...

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   ''जिस साहित्य से हमारी सुरुचि न जागे, आध्यात्मिक और मानसिक तृप्ति न मिले, हम में शक्ति और गति न पैदा हो, हमारा सौंदर्य-...
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Vinayak Ranjan
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